Posts

मधुर व्यवहार

        एक राजा ने सपने में देखा,उससे एक परोपकारी साधु कह रहा था कि, बेटा! कल रात को तुम्हें एक विषैला सांप काटेगा और उसके काटने से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। वह सर्प अमुक पेड़ की जड़ में रहता है। वह तुमसे पूर्व जन्म की शत्रुता का बदला लेना चाहता है।       सुबह हुई.........               राजा सोकर उठा। और सपने की बात अपनी आत्मरक्षा के लिए क्या उपाय करना चाहिए? इसे लेकर विचार करने लगा।            सोचते सोचते राजा इस निर्णय पर पहुंचा कि मधुर व्यवहार से बढ़कर शत्रु को जीतने वाला और कोई हथियार इस पृथ्वी पर नहीं है। उसने सर्प के साथ मधुर व्यवहार करके उसका मन बदल देने का निश्चय किया।              शाम होते ही राजा ने उस पेड़ की जड़ से लेकर अपनी शय्या तक फूलों का बिछौना बिछवा दिया, सुगन्धित जलों का छिड़काव करवाया, मीठे दूध के कटोरे जगह जगह रखवा दिये और सेवकों से कह दिया कि रात को जब सर्प निकले तो कोई उसे किसी प्रकार कष्ट पहुंचाने की कोशिश न करें।   ...

सफलता का श्रेय

  सफलता का श्रेय किसे मिले इस प्रश्न पर एक दिन विवाद उठ खड़ा हुआ। संकल्प ने अपने को, 'बल' ने अपने को और 'बुद्धि' ने अपने को अधिक महत्वपूर्ण बताया। तीनों अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। अन्त में तय हुआ कि 'विवेक' को पंच बना इस झगड़े का फैसला कराया जाय।* *तीनों को साथ लेकर विवेक चल पड़ा। उसने एक हाथ में लोहे की टेड़ी कील ली और दूसरे में हथौड़ा। चलते-चलते वे लोग ऐसे स्थान में पहुँचे जहाँ एक सुन्दर बालक खेल रहा था। विवेक ने बालक से कहा कि- बेटा इस टेड़ी कील को अगर तुम हथौड़ा से ठोक सीधी कर दो तो मैं तुमको भर पेट मिठाई खिलाऊँ और खिलौने से भरी एक पिटारी भी दूँ।* *बालक की आँखें चमक उठी। वह बड़ी आशा और उत्साह से प्रयत्न करने लगा। पर कील को सीधा कर सकना तो दूर उससे हथौड़ा उठा तक नहीं। भारी औजार उठाने के लायक उसके हाथों में बल नहीं था। बहुत प्रयत्न करने पर सफलता न मिली तो बालक खिन्न होकर चला गया। इससे उन लोगों ने यह निष्कर्ष निकाला कि सफलता प्राप्त करने को अकेला संकल्प अपर्याप्त है।* *चारों आगे बढ़े तो थोड़ी दूर जाने पर एक श्रमिक दिखाई दिया। वह खर्राटे लेता हुआ सो र...

नोबेल पुरस्कार विजेता ब्राजीली कवियत्री मार्था मेरिडोस की इसी कविता के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ

*NOBEL PRIZE* *नोबेल पुरस्कार विजेता ब्राजीली कवियत्री  मार्था मेरिडोस की* *इसी कविता के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ *  .... --*--*--*--*--*--*--*--*-- *नित जीवन के संघर्षों से* *जब टूट चुका हो अन्तर्मन,* *तब सुख के मिले समन्दर का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *जब फसल सूख कर जल के बिन* *तिनका -तिनका बन गिर जाये,* *फिर होने वाली वर्षा का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन* *यदि दुःख में साथ न दें अपना,* *फिर सुख में उन सम्बन्धों का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *छोटी-छोटी खुशियों के क्षण* *निकले जाते हैं रोज़ जहां,* *फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *मन कटुवाणी से आहत हो* *भीतर तक छलनी हो जाये,* *फिर बाद कहे प्रिय वचनों का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* *सुख-साधन चाहे जितने हों* *पर काया रोगों का घर हो,* *फिर उन अगनित सुविधाओं का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* ...!! Edit by Naseer khan j

सभी धर्मों को सम्मान व चन्दा देता था औरंगज़ेब

Image
सभी धर्मों को सम्मान व चन्दा देता था औरंगज़ेब ============================= पुस्‍तक का नाम, भारतीय संस्क्रति और मुग़ल सम्राज्य लेखक: प्रो. बी. एन पाण्डेय, भूतपूर्व राज्यपाल उडीसा, राज्यसभा के सदस्य, इलाहाबाद, नगरपालिका के चेयरमैन एवंम इतिहासकार *************************************** जब मैं इलाहाबाद नगरपालिका का चेयरमैन था (1948 ई. से 1953 ई. तक) तो मेरे सामने दाखिल-खारिज का एक मामला लाया गया। यह मामला सोमेश्वर नाथ महादेव मन्दिर से संबंधित जायदाद के बारे में था। मन्दिर के महंत की मृत्यु के बाद उस जायदाद के दो दावेदार खड़े हो गए थे। एक दावेदार ने कुछ दस्तावेज़ दाखिल किये जो उसके खानदान में बहुत दिनों से चले आ रहे थे। इन दस्तावेज़ों में शहंशाह औरंगज़ेब के फ़रमान भी थे। औरंगज़ेब ने इस मन्दिर को जागीर और नक़द अनुदान दिया था। मैंने सोचा कि ये फ़रमान जाली होंगे। मुझे आश्चर्य हुआ कि यह कैसे हो सकता है कि औरंगज़ेब जो मन्दिरों को तोडने के लिए प्रसिद्ध है, वह एक मन्दिर को यह कह कर जागीर दे सकता है कि यह जागीर पूजा और भोग के लिए दी जा रही है। आखि़र औरंगज़ेब कैसे बुतपरस्ती के साथ अपने को शर...

दुनिया का सबसे खतरनाक जीव:- छछुंदर

Image

_नोट पर क्यों लिखा होता हैं कि"में धारक को 100 रूपये अदा करने का वचन देता हूँ"

*_नोट पर क्यों लिखा होता हैं कि"में धारक को 100 रूपये अदा करने का वचन देता हूँ"_* 👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 *_भारत का केन्द्रीय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक है जो कि एक रुपये के नोटों को छोड़कर सभी मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई करती है. ज्ञातव्य है कि एक रुपये के नोट पर भारत के वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं जबकि अन्य नोटों पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं._* *₹सन 1935 से पहले, मुद्रा छपाई की जिम्मेदारी भारत सरकार के पास थी. भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 के तहत की गई थी. इसका मुख्यालय मुम्बई में है. भारतीय रिजर्व बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के आधार पर मुद्रा प्रबंधन की भूमिका प्रदान की गई थी. भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 22; रिज़र्व बैंक को नोट जारी करने का अधिकार देती है.-* *_भारत में नोटों की छपाई का काम न्यूनतम आरक्षित प्रणाली (Minimum Reserve System) के आधार पर किया जाता है.  यह प्रणाली भारत में 1957 से लागू है.  इसके अनुसार रिज़र्व बैंक को यह अधिकार है कि वह RBI फंड में कम से कम 200 क...

उच्चतम् न्यायालय के न्यायाधीश, जो परिवारिक झगडे़ सुलझाने वाले न्यायालय से सम्बंधित थे, उन की 10 सलाहें।

उच्चतम् न्यायालय के न्यायाधीश, जो परिवारिक झगडे़ सुलझाने वाले न्यायालय से सम्बंधित थे, उन की 10 सलाहें। 1. अपने बेटे और पुत्र वधु को विवाह उपरांत अपने साथ रहने के लिए उत्साहित न करें, उत्तम है उन्हें अलग, यहां तक कि किरायेे के मकान में भी रहने को कहें, अलग घर ढूूँढना उनकी परेशानी है। आप और बच्चों के घरों की अधिक दूरी आप के सम्बंधों को वेहतर बनायेगी। 2. अपनी पुत्र वधु से अपने पुत्र की पत्नी कि तरह व्यवहार करें, न की अपनी बेटी की तरह, आप मित्रवत् हो सकते हैं। आप का पुत्र सदैव आप से छोटा रहेगा, किन्तु उस की पत्नी नहीं, अगर एक बार भी उसे डांट देंगें तो वह सदैव याद रखेगी वास्तविकता में केवल उस की माँ ही उसे डाँटने या सुधारने का एकाधिकार रखती है आप नहीं। 3. आपकी पुत्रवधु की कोई भी आदत या उस का चरित्र किसी भी अवस्था मैं आप की नहीं, आप के पुत्र की परेशानी है, क्योंकि पुत्र व्यस्क है। 4. ईकट्ठे रहते हुए भी अपनी अपनी जिम्मेदारियाँ स्पष्ट रखें, उनके कपड़े न धोयें, खाना न पकायें या आया का काम न करें, जब तक पुत्रवधू उसके लिए आप से प्रार्थना न करे, और अगर आप ये करने में सक्षम हैं, एवम् प्र...