नोबेल पुरस्कार विजेता ब्राजीली कवियत्री मार्था मेरिडोस की इसी कविता के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ
*NOBEL PRIZE* *नोबेल पुरस्कार विजेता ब्राजीली कवियत्री मार्था मेरिडोस की* *इसी कविता के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ * .... --*--*--*--*--*--*--*--*-- *नित जीवन के संघर्षों से* *जब टूट चुका हो अन्तर्मन,* *तब सुख के मिले समन्दर का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *जब फसल सूख कर जल के बिन* *तिनका -तिनका बन गिर जाये,* *फिर होने वाली वर्षा का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन* *यदि दुःख में साथ न दें अपना,* *फिर सुख में उन सम्बन्धों का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *छोटी-छोटी खुशियों के क्षण* *निकले जाते हैं रोज़ जहां,* *फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *मन कटुवाणी से आहत हो* *भीतर तक छलनी हो जाये,* *फिर बाद कहे प्रिय वचनों का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* *सुख-साधन चाहे जितने हों* *पर काया रोगों का घर हो,* *फिर उन अगनित सुविधाओं का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* ...!! Edit by Naseer khan j
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