*NOBEL PRIZE* *नोबेल पुरस्कार विजेता ब्राजीली कवियत्री मार्था मेरिडोस की* *इसी कविता के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ * .... --*--*--*--*--*--*--*--*-- *नित जीवन के संघर्षों से* *जब टूट चुका हो अन्तर्मन,* *तब सुख के मिले समन्दर का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *जब फसल सूख कर जल के बिन* *तिनका -तिनका बन गिर जाये,* *फिर होने वाली वर्षा का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन* *यदि दुःख में साथ न दें अपना,* *फिर सुख में उन सम्बन्धों का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *छोटी-छोटी खुशियों के क्षण* *निकले जाते हैं रोज़ जहां,* *फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं ।।* *मन कटुवाणी से आहत हो* *भीतर तक छलनी हो जाये,* *फिर बाद कहे प्रिय वचनों का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* *सुख-साधन चाहे जितने हों* *पर काया रोगों का घर हो,* *फिर उन अगनित सुविधाओं का* *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* ...!! Edit by Naseer khan j
सभी धर्मों को सम्मान व चन्दा देता था औरंगज़ेब ============================= पुस्तक का नाम, भारतीय संस्क्रति और मुग़ल सम्राज्य लेखक: प्रो. बी. एन पाण्डेय, भूतपूर्व राज्यपाल उडीसा, राज्यसभा के सदस्य, इलाहाबाद, नगरपालिका के चेयरमैन एवंम इतिहासकार *************************************** जब मैं इलाहाबाद नगरपालिका का चेयरमैन था (1948 ई. से 1953 ई. तक) तो मेरे सामने दाखिल-खारिज का एक मामला लाया गया। यह मामला सोमेश्वर नाथ महादेव मन्दिर से संबंधित जायदाद के बारे में था। मन्दिर के महंत की मृत्यु के बाद उस जायदाद के दो दावेदार खड़े हो गए थे। एक दावेदार ने कुछ दस्तावेज़ दाखिल किये जो उसके खानदान में बहुत दिनों से चले आ रहे थे। इन दस्तावेज़ों में शहंशाह औरंगज़ेब के फ़रमान भी थे। औरंगज़ेब ने इस मन्दिर को जागीर और नक़द अनुदान दिया था। मैंने सोचा कि ये फ़रमान जाली होंगे। मुझे आश्चर्य हुआ कि यह कैसे हो सकता है कि औरंगज़ेब जो मन्दिरों को तोडने के लिए प्रसिद्ध है, वह एक मन्दिर को यह कह कर जागीर दे सकता है कि यह जागीर पूजा और भोग के लिए दी जा रही है। आखि़र औरंगज़ेब कैसे बुतपरस्ती के साथ अपने को शर...
एक राजा ने सपने में देखा,उससे एक परोपकारी साधु कह रहा था कि, बेटा! कल रात को तुम्हें एक विषैला सांप काटेगा और उसके काटने से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। वह सर्प अमुक पेड़ की जड़ में रहता है। वह तुमसे पूर्व जन्म की शत्रुता का बदला लेना चाहता है। सुबह हुई......... राजा सोकर उठा। और सपने की बात अपनी आत्मरक्षा के लिए क्या उपाय करना चाहिए? इसे लेकर विचार करने लगा। सोचते सोचते राजा इस निर्णय पर पहुंचा कि मधुर व्यवहार से बढ़कर शत्रु को जीतने वाला और कोई हथियार इस पृथ्वी पर नहीं है। उसने सर्प के साथ मधुर व्यवहार करके उसका मन बदल देने का निश्चय किया। शाम होते ही राजा ने उस पेड़ की जड़ से लेकर अपनी शय्या तक फूलों का बिछौना बिछवा दिया, सुगन्धित जलों का छिड़काव करवाया, मीठे दूध के कटोरे जगह जगह रखवा दिये और सेवकों से कह दिया कि रात को जब सर्प निकले तो कोई उसे किसी प्रकार कष्ट पहुंचाने की कोशिश न करें। ...
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