सेक्स के आखिर में महिला आंखे बंद क्यों कर लेती है ?,ऑखो की रोचक जानकारीं

हमारी आंखो में जबरदस्त मेडिकल पाॅवर होती है. इनमें धूल, मिट्टी को छानने की क्षमता होती है. और By chance, आँख के शीशे पर थोड़ी बहुत स्क्रेच लग भी जाती है तो आंख  उसे 48 घंटे के अंदर ठीक कर लेती है.

✍हमारी आंखे केवल दो कोशिकाओं (cells) की वजह से देख पाती है. Rod cells और Cone cells. हमारी आंखो में 13 करोड़ rod और 70 लाख cone cells होती है. Rod cells की मदद से ही आप अंधेरे में देख पाते है.

✍आदमी की आंख 576 मेगापिक्सल की है. इसे एक जगह फोकस करने में केवल 2 मिलीसेकंड का समय लगता है. इस जितना तेज और साफ कैमराबनाना वैज्ञानिकों की समझ से परे है.

✍हमारी आंखो का कलर ‘melalin’ पर निर्भर करता है. नीली आंखो वाले लोगो में ज्यादा मेलालिन पाया जाता है.

👉 कुछ लोगो की दोनो आँखो का रंग अलग-अलग होता है. इसे Hererochromia कहा जाता है.

🙇‍♀नवजात बच्चा 15 इंच की दूरी तक ही ठीक से देख पाता है. और जन्म से लेकर मौत तक आपकी आँखो का एक ही साइज रहता है. ये घटती बढ़ती नही.

🏃‍♀आंखे, शरीर का दूसरा सबसे जटील (पेचीदा, complex) अंग है. (दिमाग के बाद). जिसमें 20 लाख पार्टस होते है और यह हर घंटे 4.5kb (0.034 MB) जानकारी का आदान-प्रदान करती रहती है.

😢 रोने पर आपकी नाक इसलिए बहती है क्योंकि आंसू नाक के रास्ते रिसने लगते है.

👁आंखे लगभग एक मिनट में 17 बार, एक दिन में 14,280 बार और एक साल में 52 लाख बार झपकती है. एक बार आंख झपकाने में 100 से 150 milliseconds लगते है लेकिन एक सेकंड में 5 से ज्यादा बार आँख झपकाना असंभव है. अगर पूरी जिंदगी का आंख झपकाने का समय जोड़ा जाए तो यह 1 साल से ज्यादा होगा. आँख झपकाने के दो कारणहै: आँखो में नमी बनाए रखना और बाहरी कणों से आंखो को बचाना.
सेक्स के आखिर में महिला आंखे बंद क्यों कर लेती है ?
आंखे बंद करके किसी भी एक चीज पर फोकस करना आसान हो जाता है. इसलिए अगर कोई महिला सेक्स के दौरान अपनी आंखे बंद करती है तो इसका मतलब वो इसका पूरा मजा ले रही है. 93 प्रतिशत महिलाएं चरमसुख का अनुभव तभी कर पातीं हैं जब उनकी आंखें बंद होती हैं.

🌞अंधेरे और रोशनी के हिसाब से हमारी आंखे खुद को एडजस्ट कर लेती है. इसे देखने के लिए एक प्रयोग करे: बल्ब बंद करके अपनी बाथरूम में जाएं, और थोड़ी देर बाद शीशे के सामने खड़े होकर बल्ब जला दे. आप शीशे में देखोगे की कैसे हमारी आंखो की पुतलियाँ सिकुड़ती है.

💫बाज़ की नज़र हमसे 4 से 5 गुना तेज़ होती है. इंसान की आंखो के लिए दृष्टि की शुद्धता 20/20 तय की गई है बल्कि बाज़ के लिए यही 20/4 तय की गई है. मतलब, जिस चीज़ को इंसान की आंखे 20 फीट की दूरी से देख पाती है उसी चीज को बाज 100 फीट की दूरी से देख लेता है.इंसान की आंखे कितनी दूर तक देख सकती है ?
यदि सपाट धरती पर पूरा अंधेरा हो तो 48km दूर से भी मोमबती की लौ देखी जा सकती है. आंखो का देखना दूरी पर निर्भर नही करता बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि light और photon के कितने कण उस वस्तु से निकल रहे है. photon के 5 से 14 कण और आंखो की 5 से 14 rod cells की activation (सक्रियता) ही काफी है दिमाग को ये बताने के लिए कि हम कुछ देख रहे है.
Thanks for reading
💫💦👁👁👁👁 save your eyes
Naseer khan j
Fo

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