असली वारिस उनकी बेटी है

राम प्रसाद जी का निधन हो गया था , लोग अर्थी उठाकर अंतिम यात्रा के लिए शमशान भूमि  ले जाने लगे तो कुड़ी मल सेठ आगे आया और अर्थी का एक कोना पकड़ लिया और बोला के ''राम प्रसाद जी से  मुझे  5 लाख लेने  है, पहले मुझे पैसे दो फिर अर्थी को ले जाने दूंगा''।

अब सब लोग गुस्से व गमगीन भाव में , राम प्रसाद जी के बेटों ने कहा '' पापा ने  हमें तो कोई ऐसी बात नही कही कि वह कर्जदार है, इसलिए हम नही दे सकते''  राम प्रसाद जी के भाइयों ने कहा के '' जब भैया के  बेटे जिम्मेदार नही तो हम क्यों दें'' । अब सारे खड़े है और सेठ जी ने अर्थी पकड़ी हुई है !  जब काफी देर गुजर गई तो बात घर की औरतों तक भी पहुंच गई। राम प्रसाद जी की बेटी ने जब बात सुनी तो फौरन अपना सारा ज़ेवर उतारा और अपनी सारी नकद रकम जमा करके सेठ जी के पास भिजवा दी और कहा कि ''भगवान के लिए ये रकम और जेवर बेच के पापा द्वारा ली गई क़र्ज़ की अदायगी कर लो  और बाकी भी बचा हुआ क़र्ज़ वापस कर दूंगी, मेरे पिताजी की अंतिम यात्रा को ना रोको। मैं मरने से पहले पापा का  सारा कर्ज अदा कर दूंगी'' ।
अब अर्थी पकड़ने वाले सेठ जी खडे हुए और सारे लोगो से मुखातिब हो कर बोले:

''असल बात ये है कि मैने  राम प्रसाद जी  से 5 लाख क़र्ज़ लिया था जो ब्याज सहित उन्हें वापस करना था,  क्यों की मै इनके  किसी वारिस को  जानता नही था तो मैने ये  नाटक  किया। अब मुझे पता चल चुका है के उनकी असली वारिस उनकी बेटी है , कोई बेटा या भाई नही है'' । 

कर्ज़दार घर आया और बेटी को पांच लाख रूपये व् ब्याज वापस कर दिया  और जाने लगा, पर जाते जाते एक बात कह गया ।

*नादान है जो बेटियों को पराया समझते हैं*।
Naseer khan j
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