कोचिंग क्लासेज की कहानी,मेरी जूबानी


" कोचिंग क्लासेज की कहानी" 10 मई से 20 जून तक 10 घंटे की कक्षाएं रोजाना, ग्रीष्म कालीन बैच ₹20000 फीस और रहना खाना ₹6000 यानी ₹30000 हो गया ???~~~~~~~???? कई मित्र मिले कुछ सरकारी और कुछ तैयारी करने वाले, सबको रूम की तलाश है। हॉस्टल की तलाश है । कोचिंग क्लासेज जॉइन कर ली । फीस जमा करा दी। भीषण गर्मी और उमस से बुरा हाल है उनका। पीठ पर एक थैला जिसमें कुछ किताबें कुछ कपड़े और भीड़ भरे शहर का सफर ।कुछ को हॉस्टल मिला , जिसमें एक रूम में चार लड़के, सामूहिक रहना -खाना . रोजाना कोचिंग और भागदौड़ , कोचिंग में गुरुजी क्या पढ़ाते हैं केवल मलाई उतारते हैं , और हो गया टोपीक पूरा जैसे... एक साथी की नोट्स कॉपी में मिला "राजस्थान का इतिहास" मजाकिया चुटकुले अंदाज से गुरुजी ने 45 मिनट पढ़ा दिया और दोस्त ने लिख दिया, नोट्स बना लिए, कोई अंदाजा नहीं कि इस टॉपिक से कोई सवाल पहले आया था ?आया तो कौन-कौन से आए थे? इस बार कौन से आएंगे? कौन से नहीं ? यह सब तो बताया नहीं , बस सूट बूट में आए कोच या गुरुजी मलाई उतारकर पढ़ा कर चले गए और विद्यार्थी खुश हो गये, की क्या जबरदस्त पढ़ाया है short tricks के साथ, सच मे तो ,इससे अच्छा तो राजस्थान अध्ययन की पुस्तक पढ़ लेता तो याद हो जाता । सामग्री मिल जाती। लेकिन नहीं? कोचिंग के जाल ने खींचा एक गांव के बंदे को और वह आकर फस गया कोचिंग के बिछाए जाल में | ऐसे कई जाल जोधपुर जयपुर जैसे शहरों में संचालित है | और ग्रामीण परिवेश के कई भोले भाले विद्यार्थियों को लूट रहे हैं| सच्चाई तो यह है कि ....सेल्फ स्टडी करने वाला ग्राम सेवक IAS RAS बन जाता है, तृतीय श्रेणी अध्यापक स्कूल लेक्चरर या कॉलेज लेक्चरर बन जाता है। विज्ञान और गणित को छोड़कर, सेल्फ स्टडी करने वाला, अपनी मेहनत से सरकारी सेवक आसानी से बन जाता है क्योंकि वह सिलेक्टेड किताबों और सही मार्गदर्शन से , 4 से 8 घंटे रोजाना नियमित तैयारी करता है, अपने घर परिवार के साथ रहता है ,समय का समुचित उपयोग करता है । ना की शहरों की चकाचौंध से आकर्षित होकर , कोचिंग के चक्कर में पड़कर, सिटी बसों के चक्कर में आने जाने में समय खराब कर, टिपन और होटल का खाना खाकर , सुर्या नमकीन, भाटी या नागौरी पर चाय नाश्ता कर, Second hand aur book world पर भारी भीड़ को देखकर, चमकीले कवर और 50%-60% की छुट वाली गाइड खरीदने में समय खराब करता है। पैसे समय संसाधन और प्रयास खराब करता है। मैं आज ऐसा इसलिए बोल रहा हूं । क्योंकि मैंने इन सब चीजों को देखा है, अनुभव किया है नये नये तैयारी करने वाले जब शहर में आते है विज्ञापन से आकर्षित होकर जैसे , बाड़मेर जालौर , जैसलमेर और नागौर से आने वाले कई साथी मुझे फोन करते हैं मेरे रूम पर आते हैं कोचिंग ज्वाइन करने के बहाने और बड़े परेशान होकर दुखी होकर गांव चले जाते हैं ।क्योंकि उनका अध्ययन अस्थाई रूप से कोचिंग क्लासेज पर निर्भर हैं। और कोचिंग क्लासेस ऐसे लोगों का जमकर मजे लेता है आप अपनी राय दीजिए | क्या यह कोचिंग क्लासेस सरकारी सेवा दिलाने में इतनी कारगर है या फिर केवल मात्र पैसे लूटने वाला आकर्षण.... प्यारे साथियों, कल के सिकंदरो , पढ़ने के लिए क्या चाहिए? खुद का निर्णय और खुद पर विश्वास ....माता-पिता रिश्तेदारों का सहयोग और आशीर्वाद ...स्वच्छ तन और मन ... सिलेबस के अनुसार किताबें .... आस-पड़ोस के किसी सफल व्यक्ति का मार्गदर्शन ....शांत वातावरण में पढ़ने की जगह और घर से उपलब्ध होने वाला रहना और खाना और बस 4 से 8 घंटे पढ़ लो, आस पड़ोस में थोड़ा घूम लो, मन भी लग जाएगा और चलते रहो सफर लंबा है लेकिन लगातार मेहनत बिना किसी टेंशन के आपको एक दिन मंजिल पर जरूर पहुंचाएगी ना की कोचिंग क्लासेज..... Naseer khan j

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