#अंकल_अपने_राशन_और_कपड़े_वापस_ले_जाएं...
पिछले साल राशन और कपड़े लेते हुए अखबार में हमारी तस्वीर छपी थी.....
ईद के दिन मुहल्ले के बच्चे हमें भिकारी-भिकारी चिढ़ा रहे थे..... जबसे अम्मी को लोग हकारत की नज़र से देखते है ।
********************************************
#10_साल_की_बच्ची_का_खैराती_इदारों_के_नाम_खत
अस्सलामुअलैकुम अंकल:
मेरा नाम कनीज़ा है... हम आपके आफिस के पीछे वाली बस्ती में रहते है ।
कुछ दिन पहले आप हमारे गरीब खाने तशरीफ़ लाये थे...ये देखने के हम गरीब है कि नही.ताके आप हमारी माली मदद कर सके ।
कुछ दिन बाद फिर आप पांच छ लोगों के साथ हमारे घर आये..... हमे राशन दिया....अम्मी..मेरे और भाई के लिए... ईद के जोड़े दिए...फ़ोटो खिंचवाई और चले गए ।
अंकल आपको मालूम है मैं जब चार साल की थी...तब मेरे बाबा अल्लाह को प्यारे हो गए थे.....बाबा के जाते ही दादी ने अम्मी को मार मार के घर से निकाल दियाथा....... उस वक़्त भाई अम्मी के पेट मे था..और मैं चार साल की छोटी सी बच्ची थी।
अम्मी दर दर की ठोकरे खाती रही..किसी रिश्तेदार ने भी हमारी मदद न की....हमारा कोई हाल पूछने वाला न था..... अम्मी दूसरों के घर जाके बर्तन धोती....,सफाई करती..... फिर जाके कुछ पैसे जमा होते,....जिससे वो मेरा और अपना पेट भरती।
पेट तो अम्मी का अमीर लोगों की गालियां खा कर भी भर जाता जहां वो काम करती थी।
अम्मी मेरे सामने तो हमेशा मुस्कुराती रहती है पर मुझे मालूम है रात को वो छुप छुप कर रोती है...और अपना गम हल्का करती है । कल अम्मी फिर बहुत रो रही थी.... न जाने क्या वजह थी के वो चुप ही नही हो रही थी. ....
जब आँखों से आंसू सूख गए तो वो सो गई. मैं उठ कर उनके पाओं दबाने लगी ताके उनको कुछ आराम आ जाये.... पाओं दबाते दबाते मेरी नज़र अम्मी के हाथों में रखे अखबार पर पड़ी जिसमे अम्मी....मेरी और भाई की आपसे राशन और कपड़े लेने की तस्वीर थी..... मैं समझ गयी अम्मी क्यों रो रही थी......पिछले साल भी ऐसा ही हुआ था.... तस्वीर की वजह से बस्ती में सबने हमारा खूब मजाक बनाया था.....
जब हम ईद के कपड़े पहन कर बाहर खेलने गए तो सब हमे भिकारी-भिकारी कह कर तंग कर रहे थे। अम्मी को भी मुहल्ले वाले हकारत की नज़र से देखते है।
अंकल आप से दरखास्त है आप नए कपड़े और राशन वापस ले जाएं.....मुझे मेरी अम्मी से बहुत मुहब्बत है .....हमारी वजह से उनकी आंखों में आँसू आये ये मुझे मंजूर नही। वैसे भी हम गरीबों की ईद नही होती।
आपसे एक और दरख्वास्त है किसी भी गरीब की मदद करें तो उसे अखबार.... सोशल साइट्स पर उसका दिखावा न करें......बाद में उन्हें जो तकलीफ उठानी पड़ती है.......,उसका आपको अंदाजा नही.....अपने सगे रिश्तेदार तक हकारत की नज़रों से देखते है ।
अल्लाह ने आपको दौलत दी है इसमें आप का तो कमाल नही........ अल्लाह ने हमें गरीब बनाया है इसमें उसकी हिक्मत होगी ..!!!
अल्लाह सबको खुश रखे...आमीन
अल्लाह के लिए खैरात या इमदाद (मदद) करो तो उसका दिखावा करके गरीबों का मज़ाक मत उड़ाओ...!!!
कहानी real है काल्पनिक न समझें
Please ईस पर आप जरूर आत्म चिंतन करें
आपका अपना *नसीर खान j*
Naseer khan j
Comments
Post a Comment